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गायत्री मंत्र - ॐ भूर्भुव: स्वः। तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

शान्ति पाठ
ॐ शान्तिरन्तरिशँ, शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः

शान्तिरोषधयः शान्ति वनस्पतयः शान्तिविशवेदेवाः

शान्तिब्रमहा शान्तिँ, सवॅ शान्तिः शान्तिरेव

शान्ति सामा शान्तिः, शान्तिरेधि़, शुभ शान्तिभॅवतु

ऒं शान्तिः, शान्तिः, शान्तिः ॥

संकल्प मंत्र

दाहिने हाथ में जल, पुष्प तथा अक्षत लेकर निम्न संकल्प करे-

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु: भामद्भागवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य ब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतित मे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे आर्यावर्तैकदेशे........नगरे/ग्रामे.....वैक्रमाब्दे......संवत्सरे....मासे.....पक्षे....तिथौ.....वासरे.....गोत्र: शर्मा/वर्मा/गुप्तोऽहं श्रीगायत्रीप्रीत्यर्थं* सहस्रनामस्तोपाठं करिष्ये।

हाथ का जलाक्षत छोड़ दे। (यदि सहस्रार्चन करना हो तो ‘सहस्रनामार्चनं करिष्ये’-ऐसा बोलना चाहिये।)

राष्ट्राभिवर्द्धन मन्त्र

आ ब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायतामाराष्ट्रे राजन्य़ः शूर ईषव्यातिव्याधी महारथो जायतां दोग्ध्री धेनुर्वोढानड्वानाशुः सप्तिः पुरन्ध्रिर्योषा जिष्णूरथेष्टा सभेयो युवाऽस्य यजमानस्यवीरो जायताम्। निकामे निकामे नः पर्जन्यो वर्षतु फलवत्यो न ओषधयः पच्यन्ताम् योगक्षेमो नः कल्प्यताम्। -- (शुक्ल यजुर्वेद ; अध्याय २२, मंत्र २२)

Hindu Mantra: 15 ऐसे हिन्दू श्लोक व् मंत्र जो बच्चों को सिखाने चाहिए

    

Every Hindu should know these mantras

हिन्दू धर्म के 15 श्लोक व् मंत्र जो हर हिंदू को सीखना और अपने बच्चों को सिखाना चाहिए

Every Hindu should know these mantrasEvery Hindu should know these mantras

नमस्कार मित्रो, आजकल की भागदौड़ वाली ज़िन्दगी में परिवार में सभी लोग बहुत व्यस्त हो गए हैं. इसी वजह से आपस में बातचीत भी बहुत कम हो गई है। माता पिता दोनों ही काम काज वाले हैं। इसी बीच बच्चों को जीवन सम्बंधित ज्ञान नहीं मिल पाता, लेकिन पेरेंट्स को जीवन मूल्यों को सीखना भी चाहते हैं। धर्म शास्त्र की विद्या के लिए बच्चों के पास समय नहीं मिलता। आज हम 15 इसे मन्त्रों को लेकर आये हैं जिसके उच्चारण से बच्चे एनर्जी फील कर सकते हैं। इन शक्तिशाली मन्त्रों को अपने बच्चों को सीखना ना भूलें। आइये पढ़ें कौन से हैं ये प्रभावशाली हिन्दू मंत्र 

1. श्री गणेश जी मंत्र (Shri Ganesh ji Mantra)

वक्रतुंड महाकाय,
सूर्य कोटि समप्रभ
निर्विघ्नम कुरू मे देव,
सर्वकार्येषु सर्वदा !!

2. श्री महादेव जी (Shri Mahadev ji Mantra)

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे,
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ,
उर्वारुकमिव बन्धनान्,
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् !!

3. श्री हरि विष्णु मंत्र (Shri hari Vishnu Mantra)

मङ्गलम् भगवान विष्णुः,
मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः,
मङ्गलाय तनो हरिः॥

4. श्री ब्रह्मा जी मंत्र (Shri Brahma ji Mantra)

ॐ नमस्ते परमं ब्रह्मा,
नमस्ते परमात्ने ।
निर्गुणाय नमस्तुभ्यं,
सदुयाय नमो नम:।।

5. श्री कृष्ण मंत्र (Shri Krishna Mantra)

वसुदेवसुतं देवं,
कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकी परमानन्दं,
कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम।

श्लोक व् मंत्र हिन्दू धर्म की पहचान है। मन्त्रों के माध्यम से हम अपने देवताओं की पूजा ही नहीं करते बल्कि अपनी सस्कृति व अपना इतिहास भी सजोकर रखते हैं। कुछ मंत्र जो हर हिंदू को पता होना चाहिए लेकिन हमारा आग्रह है कि आप खुद भी याद करें और अपने बच्चों को भी याद करायें।

6. श्री राम मंत्र (Shri Ram Mantra)

श्री रामाय रामभद्राय,
रामचन्द्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय,
सीताया पतये नमः !

7. मां दुर्गा मंत्र (Maa Durga Mantra)

ॐ जयंती मंगला काली,
भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री,
स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।।

8. मां महालक्ष्मी मंत्र (Maa Mahalakshmi Mantra)

ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो,
धन धान्यः सुतान्वितः ।
मनुष्यो मत्प्रसादेन,
भविष्यति न संशयःॐ ।

9. मां सरस्वती मंत्र (Maa Saraswati Mantra)

ॐ सरस्वति नमस्तुभ्यं,
वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि,
सिद्धिर्भवतु मे सदा ।।

10. मां महाकाली मंत्र (Maa Mahakali Mantra)

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं,
हलीं ह्रीं खं स्फोटय,
क्रीं क्रीं क्रीं फट !!

11. श्री हनुमान जी मंत्र (Shri Hanuman ji Mantra)

मनोजवं मारुततुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं,
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

12. श्री शनिदेव जी मंत्र (Shri Shanidev Ji Mantra)

ॐ नीलांजनसमाभासं,
रविपुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तण्डसम्भूतं,
तं नमामि शनैश्चरम् ||

13. श्री कार्तिकेय जी मंत्र (Shri Kartikeya Ji Mantra)


ॐ शारवाना-भावाया नम:,
ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा ,
वल्लीईकल्याणा सुंदरा।
देवसेना मन: कांता,
कार्तिकेया नामोस्तुते ।

14. काल भैरव जी मंत्र (Kaal Bhairav ji Mantra)

ॐ ह्रीं वां बटुकाये,
क्षौं क्षौं आपदुद्धाराणाये,
कुरु कुरु बटुकाये,
ह्रीं बटुकाये स्वाहा।

15. गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra Mantra)

ॐ भूर्भुवः स्वः,तत्सवितुर्वरेण्यम्
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

यो विश्वं सर्वकर्म क्रियामाणस्य स विश्वकर्मा:


अर्थात- जो एकमात्र ब्रह्म परमात्मा समस्त संसार की उत्पत्ति से लेकर प्रलय के साथ समस्त कर्म करने की योग्यता रखता है उस परमेश्वर को ' विश्वकर्मा ' कहा जाता है।

।।ॐ नमो विश्वकर्मणे।।
विवाहादिषु यज्ञेषु गृहारामविधायके।
सर्वकर्मसु संपूज्यो विश्वकर्मा इति श्रुतम्॥
(वाराहपुराण)
अर्थात- विवाह, यज्ञ, गृह-प्रवेश आदि समस्त शुभ कार्यों में अनिवार्य रूप से प्रभु विश्वकर्मा जी का पूजन करना ही चाहिए।

यह मंत्र भी यही स्पष्ट करता है कि भगवान विश्वकर्मा लोकहितकारी है तथा उनकी पूजा जनकल्याणकारी है। अत: प्रत्येक जनमानस को सृष्टिकर्ता, शिल्पकलाधिपति, तकनीक, कला और विज्ञान के जनक प्रभु विश्वकर्मा की पूजा, आराधना व उपासना अपनी व अपने राष्ट्र की उन्नति के लिए अवश्य करें। वस्तुत: ऐसे महान देवता की पूजा करना, उत्सव मनाना और उनके संदेश को जन-जन तक पहुंचाना मनुष्य का सच्चा धर्म है।
अ॒द्भ्यः सम्भू॑तः पृथि॒व्यै रसा॓च्च । वि॒श्वक॑र्मणः॒ सम॑वर्त॒ताधि॑ ।
तस्य॒ त्वष्टा॑ वि॒दध॑द्रू॒पमे॑ति । तत्पुरु॑षस्य॒ विश्व॒माजा॑न॒मग्रे॓ ।।
-(यजुर्वेद अध्याय-31, मंत्र-17)
अर्थ - सृष्टि के प्रारंभ में सूर्य, जल और पृथ्वी का निर्माण करके विराट पुरुष परब्रह्म विश्वकर्मा ने स्वयं को साकार रूप में प्रकट किया । फिर विराट विश्वकर्मा ने स्वयं से त्वष्टा अर्थात ब्रह्मा को उत्पन्न किया। सम्पूर्ण ब्रह्मांड के अस्तित्व के पूर्व सब कुछ उन्हीं विराट विश्वकर्मा में समाहित था और समस्त सृष्टि उन्ही का रुप थी।